*??âœï¸?
    à¤à¤• बार की बात है कि यशोदा मैया पà¥à¤°à¤à¥ शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ के उलाहनों से तंग आ गयीं और छड़ी लेकर शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ की ओर दौड़ीं। जब पà¥à¤°à¤à¥ ने अपनी मैया को कà¥à¤°à¥‹à¤§ में देखा तो वह अपना बचाव करने के लिठà¤à¤¾à¤—ने लगे।à¤à¤¾à¤—ते- à¤à¤¾à¤—ते शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ à¤à¤• कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° के पास पहà¥à¤à¤šà¥‡ । कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° तो अपने मिटà¥à¤Ÿà¥€ के घड़े बनाने में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ था। लेकिन जैसे ही कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° ने शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ को देखा तो वह बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤†à¥¤ कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° जानता था कि शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥ परमेशà¥à¤µà¤° हैं। तब पà¥à¤°à¤à¥ ने कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° से कहा कि 'कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤œà¥€, आज मेरी मैया मà¥à¤ पर बहà¥à¤¤ कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ हैं। मैया छड़ी लेकर मेरे पीछे आ रही हैं। à¤à¥ˆà¤¯à¤¾, मà¥à¤à¥‡ कहीं छà¥à¤ªà¤¾ लो।' तब कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° ने शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ को à¤à¤• बड़े से मटके के नीचे छिपा दिया। कà¥à¤› ही कà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में मैया यशोदा à¤à¥€ वहाठआ गयीं और कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° से पूछने लगीं- 'कà¥à¤¯à¥‚ठरे, कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° ! तूने मेरे कनà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ को कहीं देखा है, कà¥à¤¯à¤¾ ?' कà¥à¤®à¥à¤à¤¾à¤° ने कह दिया- 'नहीं, मैया ! मैंने कनà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ को नहीं देखा।' शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ ये सब बातें बड़े से घड़े के नीचे छà¥à¤ªà¤•र सà¥à¤¨ रहे थे। मैया तो वहाठसे चली गयीं। अब पà¥à¤°à¤à¥ शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° से कहते हैं- 'कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤œà¥€, यदि मैया चली गयी हो तो मà¥à¤à¥‡ इस घड़े से बाहर निकालो।'
      कà¥à¤®à¥à¤à¤¾à¤° बोला- 'à¤à¤¸à¥‡ नहीं, पà¥à¤°à¤à¥ जी ! पहले मà¥à¤à¥‡ चौरासी लाख योनियों के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ करने का वचन दो।' à¤à¤—वान मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‡ और कहा- 'ठीक है, मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ चौरासी लाख योनियों से मà¥à¤•à¥à¤¤ करने का वचन देता हूà¤à¥¤ अब तो मà¥à¤à¥‡ बाहर निकाल दो।' कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° कहने लगा- 'मà¥à¤à¥‡ अकेले नहीं, पà¥à¤°à¤à¥ जी ! मेरे परिवार के सà¤à¥€ लोगों को à¤à¥€ चौरासी लाख योनियों के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ करने का वचन दोगे तो मैं आपको इस घड़े से बाहर निकालूà¤à¤—ा।' पà¥à¤°à¤à¥ जी कहते हैं- 'चलो ठीक है, उनको à¤à¥€ चौरासी लाख योनियों के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ होने का मैं वचन देता हूà¤à¥¤ अब तो मà¥à¤à¥‡ घड़े से बाहर निकाल दो।'Â
   अब कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° कहता है- 'बस, पà¥à¤°à¤à¥ जी ! à¤à¤• विनती और है। उसे à¤à¥€ पूरा करने का वचन दे दो तो मैं आपको घड़े से बाहर निकाल दूà¤à¤—ा।' à¤à¤—वान बोले- 'वो à¤à¥€ बता दे, कà¥à¤¯à¤¾ कहना चाहते हो ?' कà¥à¤®à¥à¤à¤¾à¤° कहने लगा- 'पà¥à¤°à¤à¥ जी ! जिस घड़े के नीचे आप छà¥à¤ªà¥‡ हो, उसकी मिटà¥à¤Ÿà¥€ मेरे बैलों के ऊपर लाद के लायी गयी है। मेरे इन बैलों को à¤à¥€ चौरासी के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ करने का वचन दो।' à¤à¤—वान ने कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° के पà¥à¤°à¥‡à¤® पर पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर उन बैलों को à¤à¥€ चौरासी के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ होने का वचन दिया।'Â
   पà¥à¤°à¤à¥ बोले- 'अब तो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ सब इचà¥à¤›à¤¾ पूरी हो गयीं, अब तो मà¥à¤à¥‡ घड़े से बाहर निकाल दो।'Â
   तब कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° कहता है- 'अà¤à¥€ नहीं, à¤à¤—वन ! बस, à¤à¤• अनà¥à¤¤à¤¿à¤® इचà¥à¤›à¤¾ और है। उसे à¤à¥€ पूरा कर दीजिये और वो ये है- जो à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ हम दोनों के बीच के इस संवाद को सà¥à¤¨à¥‡à¤—ा, उसे à¤à¥€ आप चौरासी लाख योनियों के बनà¥à¤§à¤¨ से मà¥à¤•à¥à¤¤ करोगे। बस, यह वचन दे दो तो मैं आपको इस घड़े से बाहर निकाल दूà¤à¤—ा।'
   कà¥à¤®à¥à¤à¤¾à¤° की पà¥à¤°à¥‡à¤® à¤à¤°à¥€ बातों को सà¥à¤¨ कर पà¥à¤°à¤à¥ शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ बहà¥à¤¤ खà¥à¤¶ हà¥à¤ और कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° की इस इचà¥à¤›à¤¾ को à¤à¥€ पूरा करने का वचन दिया।
    फिर कà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤° ने बाल शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ को घड़े से बाहर निकाल दिया। उनके चरणों में साषà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚ग पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया। पà¥à¤°à¤à¥ जी के चरण धोये और चरणामृत पीया। अपनी पूरी à¤à¥‹à¤‚पड़ी में चरणामृत का छिड़काव किया और पà¥à¤°à¤à¥ जी के गले लगाकर इतना रोये कि पà¥à¤°à¤à¥ में ही विलीन हो गये।
      जरा सोच करके देखिये, जो बाल शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ सात कोस लमà¥à¤¬à¥‡-चौड़े गोवरà¥à¤§à¤¨ परà¥à¤µà¤¤ को अपनी इकà¥à¤•à¥à¤¨à¥€ अंगà¥à¤²à¥€ पर उठा सकते हैं, तो कà¥à¤¯à¤¾ वो à¤à¤• घड़ा नहीं उठा सकते थे। लेकिन बिना पà¥à¤°à¥‡à¤® रीà¤à¥‡ नहीं नटवर ननà¥à¤¦ किशोर। कोई कितने à¤à¥€ यजà¥à¤ž करे, अनà¥à¤·à¥à¤ ान करे, कितना à¤à¥€ दान करे, चाहे कितनी à¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ करे, लेकिन जब तक मन में पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ मातà¥à¤° के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤® नहीं होगा, पà¥à¤°à¤à¥ शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ मिल नहीं सकते। जय शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£à¥¤ जय शà¥à¤°à¥€ राधे राधे।
*à¤à¤• सà¥à¤‚दर कथा à¤à¥‡à¤œà¥€ है, विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ और मनन कीजिये। अचà¥à¤›à¥€ लगे तो दूसरों को à¤à¥€ à¤à¥‡à¤œà¤¿à¤!*Â
पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ नषà¥à¤Ÿ नहीं होती। उपयà¥à¤•à¥à¤¤ समय पर कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं। ईशà¥à¤µà¤° सदैव आप सà¤à¥€ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ व सà¥à¤–ी रखें।Â
Â
जय शà¥à¤°à¥€ राधेकृषà¥à¤£Â  जय à¤à¥‹à¤²à¥‡ की जय à¤à¥‹à¤²à¥‡ की जय à¤à¥‹à¤²à¥‡ की
??????राधे राधे

ABHISHEK KUMAR 3 tahun
Jai shree ram