जाट à¤à¤• पशà¥à¤ªà¤¾à¤²à¤• और किसान कबीला था । à¤à¤¾à¤°à¤¤ से ही ये कबीला मधà¥à¤¯ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ तक गया और फिर कालांतर में वापिस सिंध होते हà¥à¤ हरियाणा राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पंजाब उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में आबाद हो गया। इस कबीले की खà¥à¤¦ की सतà¥à¤¤à¤¾ होती थी खाप पंचायत के रà¥à¤ª में और खाप मà¥à¤–िया ही कबीले के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त बनाते थे और जो कबीले के नियम तोडता था उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कबीले से निकाल देते थे ठीक à¤à¤¸à¥‡ ही इस कबीले के मà¥à¤–िया ने उलà¥à¤Ÿà¤¾ चलने के कारण कà¥à¤› जाटों को इस कबीले से अलग कर दिया और वा जाट छंटे हà¥à¤ दबंग होते थे जो दà¥à¤¸à¤°à¥‡ गांव के लोगो को पीटकर आ जाते थे कà¤à¥€ उनका पशà¥à¤§à¤¨ छीन लेते थे जब ये बातें वो गांव वाले खाप मà¥à¤–िया को बताते थे तो कबीले का मà¥à¤–िया उनको जात से बेदखल कर देता था ठीक à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¤• जाटों का बदमाश गà¥à¤°à¥à¤ª मोहमà¥à¤®à¤¦ गोरी के समय उसके सेनिको को लूट खसोट करने लगा ये सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा मगर गोरी के वापिस चले जाने के बाद उसके उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी कà¥à¤¤à¥à¤¬à¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ à¤à¤¬à¤• के शासनकाल में à¤à¥€ दिलà¥à¤²à¥€ में ये लूट खसोट जारी रही जिसकी सजा बेगà¥à¤¨à¤¾à¤¹ जाटों को à¤à¥€ मिलने लगी और वो बदमाश छंटे हà¥à¤ मà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¤‚डे जाट मोज उडाते रहे à¤à¤• दिन जाट कबीले के मà¥à¤–िया ने पंचायत करके उन जाटों को गांव से निकाल दिया और जाटों को चेतावनी दे दी कोई à¤à¥€ जाट उनसे शादी नहीं करेगा जिन जाटों को खाप पंचायत के मà¥à¤–िया ने निकाला था उनमें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मेहला सांगवान तà¥à¤°à¤¾à¤¨ खोखर जाटों की संखà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थी और इसके बाद ये जाटों के गांव छोड़कर करनाल कà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के जंगलों की तरफ आकर रहने लगे ये जाट लोग मेहनती और निडर थे और खूब दबंगाई करते थे , मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® रांगडो से इनका छतीस का आंकड़ा था सो इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ढाक जंगलों को काटकर उपजाउ बनाया और जाटों से अलग होने के बाद रोड़ बनकर रहने लगे । यही वो समय था जब पहली बार रोड़ जाति असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में आई थी । ये करीबन 800-900 वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ बात होगी और ये जाट आपस में ही शादी करने लगे इन बागी हà¥à¤ जाटों ने कà¤à¥€ दà¥à¤¸à¤°à¥€ जाति के लोगों को अपने में नहीं मिलाया और ना कà¤à¥€ अपनी लड़कियां मà¥à¤—ल शासको को डोले के रà¥à¤ª में दी । आज के समय में वो तमाम बागी जाट करनाल कà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की जमीन पर रोड़ जाति के रà¥à¤ª में रहते हैं ‌। आज à¤à¥€ रोड़ जाति के बड़े बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— कहते मिल जाते हैं जब उनसे कोई पूछता है कि रोड़ कोनसी जाति है तो वो बस à¤à¤• ही जवाब देते हैं गरà¥à¤µ से हम जाटों जेसे है । रोड़ो ने कà¤à¥€ नहीं कहा कि वो गà¥à¤°à¥à¤œà¤°à¥‹à¤‚ जेसे है राजपूतो जैसे है हमेशा जाटों जैसे ही बताया इसका लाजिक à¤à¥€ यही था बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— पीढ़ी दर पीढी बताते आठथे की हम पहले जाट ही थे मगर हमें किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों से अलग कर दिया गया था । रोड़ जाति का à¤à¤• à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ तà¥à¤¯à¥Œà¤¹à¤¾à¤° नहीं है जो देशवाली जाटों से ना मिलता हो । और जो सांगवान गोतà¥à¤° के जाट बागी हà¥à¤ थे वो कोल गांव में रहते हैंÂ
और उस गांव में सिरà¥à¤« à¤à¤• ही गोतà¥à¤° के जाट आबाद हà¥à¤ थे । और मेहला गोतà¥à¤° के जाट मोहाना गांव में आबाद हà¥à¤ थे !
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ये रोड़ उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ वीर जाटों का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग है जिनको à¤à¥‚ल चूक से हमारे जाट कबीले के लोगों ने अलग कर दिया था । अपनी जड़ों को पहचानो रोड़ोÂ
