जब हमें रटाया जाता है कि पेशवाओं के राज में दलित गले में मटकी और पीठपर à¤à¤¾à¤¡à¤¼à¥‚ बांध कर घूमते थे à¤à¤¸à¥‡ में हमें चंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤° के आदिवासी कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिवीर ‘बाबà¥à¤°à¤¾à¤µ पà¥à¤²à¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‚र शेडमाके’ को पढ़ना चाहिà¤à¥¤Â
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बाबà¥à¤°à¤¾à¤µ आदिवासी गोंड जाति से आते थे। उनका परिवार à¤à¤• जमींदार परिवार था लेकिन 1818 में तीसरे आंगà¥à¤²-मराठा यà¥à¤¦à¥à¤§ में मराठों की हार के बाद उनका पूरे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° मराठों से अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के पास चला गया जिसके बाद अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ ने नई नीतियां बनाकर उनके जीवन में घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ शà¥à¤°à¥‚ कर दी।Â
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बिलà¥à¤•à¥à¤² वैसे ही जैसे वो à¤à¤¾à¤°à¤–ंड के संथाल में कर रहे थे। बाद में 1857 के समय में अपने साथियों के साथ बाबूराव ने अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼à¥‹ के खिलाप संघरà¥à¤· शà¥à¤°à¥‚ किया जो à¤à¤• साल तक चला बाद में 1857 की कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति असफल होने पर बाबूराव को फांसी पर चढ़ा दिया गया।Â
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आज दलितवादी जशà¥à¤¨ मनाते हैं कि कैसे à¤à¥€à¤®à¤¾ कोरेगांव में अंगà¥à¤°à¤œà¥‹à¤‚ ने मराठा सेना को हरा दिया था और फिर अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ का राज आया जिससे मनà¥à¤µà¤¾à¤¦ से आजादी मिली।Â
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वो अलग बात कि बाद में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ ने ही मारà¥à¤¶à¤² रेस थà¥à¤¯à¥‹à¤°à¥€ लाकर उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ महारों के ही सेना में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने पर रोक लगा दी जिनकी वजह से वे कोरेगांव यà¥à¤¦à¥à¤§ जीते थे।Â
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और सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ यह है कि उस पेशवा राज में बाबूराव जमींदार यानि राजा à¤à¥€ थे और वनवासी हिनà¥à¤¦à¥‚ à¤à¥€ और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के खिलाफ लड़ने वाला कà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤¿à¤•ारी à¤à¥€à¥¤Â
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आज इनà¥à¤¹à¥€ गोंड जाति को दो बोरा चावल पर मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® और ईसाई बनाया जा रहा है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रटा दिया गया कि हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® में तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ शोषण हà¥à¤† है।Â
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जबकि गोंड जाति के राजा और जमींदार हà¥à¤† करते थे जिनका बाद में शोषण वो अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ कर रहे थे, जिसकी जीत का जशà¥à¤¨ मनाया जाता है।
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बाबूराव हमारे हीरो है
